तेरी यादें

सोमवार, अगस्त 04, 2014
भूलने वाले से कोई कह दे जरा, इस तरह याद आने से क्या फायदा, जो मेरी दुनिया को बसाते नहीं, फिर याद आकर सताने से क्या फायदा,  ...

पुतली

रविवार, अगस्त 03, 2014
         लिखते है खैरियत के अफसाने मे, रात डाक पड़ा है थाने में, कुछ है लीन मात देने में, कुछ लगें है सह बचाने में, ऊपर-ऊपर ह...

गजल

शनिवार, अगस्त 02, 2014
                             गजल तोते दिखते ही नहीं, बाज नजर आते हैं ।             बगुले और गिद्ध के समाज नजर आते हैं । माय...
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