जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। मन की भावनाओं को लेखनी के रूप में कागज पर उतारना । पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- जेपी@डाटामेल.भारत या drjphans@gmail.com

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2 अगस्त 2014

मुझे कौन पूछता था, तेरी बंदगी से पहले

मुझे कौन पूछता था, तेरी बंदगी से पहले

मुझे कौन पूछता था, तेरी बंदगी से पहले,
मैं तुम्हीं को ढूँढता था, इस जिन्दगी से पहले,
मैं खाक का जरा था और क्या थी मेरी हस्ती,
मैं थपेड़े खा रहा था ,जैसे तूफाँ में किश्ती,
दर-दर भटक रहा था, तेरी बंदगी से पहले,

मैं इस तरह जहाँ में, जैसे खाली सीप होती,
मेरी बढ़ गयी है कीमत, तूने भर दिये है मोती,
मुझे मिल गया सहारा, कदमों में तेरे आके,
यूं तो है जहाँ में लाखों, तेरे जैसा कौन होगा,
तू है वो दरिया रहमत, तेरा जैसा कौन होगा,
मजा क्या है जिंदगी में, तेरी बंदगी से पहले,

तू जो मेहरबाँ हुआ, सारा जग ही मेहरबाँ है,
न आवाज न गला था, तेरी बंदगी से पहले,
रौशन साथी तेरे से, हर दिल में राज तेरा,
माँ भारती मेरी मैया, मेरे दिल में डालो डेरा,
दर-दर की खाक छानी, तेरी बंदगी से पहले,
मुझे कौन पूछता था, तेरी बंदगी से पहले
         -अज्ञात            



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