जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- jpn.nsu@gmail.com

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3 अगस्त 2014

पुतली

        

लिखते है खैरियत के अफसाने मे,
रात डाक पड़ा है थाने में,

कुछ है लीन मात देने में,
कुछ लगें है सह बचाने में,
ऊपर-ऊपर है दोस्ती उनमें,
है दाव-पेंच दरमियाने में,

यह फैसला लिया गया लोगों ने,
कल मिल बैठकर मयखाने में,
मरहवा, तुम बड़े माहिर निकलें,
काठ की पुतली नचाने में ।
                         -अज्ञात

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