जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- jpn.nsu@gmail.com

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17 दिसंबर 2014

श्रद्धांजली (पेशावर स्कूली हमला में मारे गये बच्चों पर)










क्यों ढाते को कहर ईश्वर,
अबोध इंसान पर ।
माता-पिता ने उनको,
प्यार-दुलार से पाला-पोसा ।
कितनी भी की गलती उसने,
फिर भी ऐसा नहीं कोसा ।
इतनी कठोर न होता,
दिल-ए-पाषाण को  ।
क्यों ढाते को कहर ईश्वर,
अबोध इंसान पर ।
कोमल-सी थी बदन उनके ।
कमल-सी थी नयन उनके ।
वाणी थे जैसे मिठे रस ।
मिठे रस को न पिलाकर,
क्यों छोड़ दिया उस नौजवान को ।
क्यों ढाते को कहर ईश्वर,
अबोध इंसान पर ।
सीख रहे थे पाठ वे,
प्रेम, शांति और भाईचारे के ।
तोड़ना था तारे उनको,
पहुँचना था चाँद पे ।
ऐसे सपने को तोड़कर,
ला दिया क्यों शमशान पे ।
क्यों ढाते को कहर ईश्वर,
अबोध इंसान पर ।
                 जे.पी.हंस





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