जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । वर्तमान में हिन्दी आशुलिपिक के पद पर पटना में कार्यरत । बेझिझक सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करना । अपनी मन की भावनाओं को लेखनी के रूप में कागज पर उतारना । पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- जेपी@डाटामेल.भारत या drjphans@gmail.com

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4 अगस्त 2014

तेरी यादें


भूलने वाले से कोई कह दे जरा,
इस तरह याद आने से क्या फायदा,
जो मेरी दुनिया को बसाते नहीं,
फिर याद आकर सताने से क्या फायदा,

            मेरा दिल को जला कर क्या मिल गया,
            मिट सका न जमाना से मेरा निशा,
            मुझ पर बिजली गिराओ तो जाने सही,
            मेरा आँसुओं पर गिराने से क्या फायदा,

क्या कहूँ आपसे कितनी उम्मीद थी,
अब क्या बदले दुनिया बदलती गयी,
आसरा देकर दिल तोड़ते है मेरा,
इस तरह याद आने से क्या फायदा,

            आपने कितनी मुझे तकलीफें दी,
            लूट जाती हूँ याद करती हुई,
            ऐसे सजदें से अल्लाह मिलता नहीं,
            हर जगह सर झुकाने से क्या फायदा ।
                                   -अज्ञात