वक्त की पुकार

सोमवार, नवंबर 10, 2014
खग-मृग छोड़ मनुज तन मिला फिर भी लाखों है शिकवे गिला गिले-शिकवे भूलाने को तन-मन में सपने बुनो वक्त की पुकार सुनो, वक्त की पुकार ...
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