जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- jphans25@gmail.com

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10 नवंबर 2014

वक्त की पुकार

खग-मृग छोड़ मनुज तन मिला
फिर भी लाखों है शिकवे गिला
गिले-शिकवे भूलाने को
तन-मन में सपने बुनो
वक्त की पुकार सुनो, वक्त की पुकार सुनो
            सपने साकार करने में तुम्हे
            लख-लख कष्ट सहने पड़े
            कर्मवीर सेना की भाँति
            अग्नि की मशाल बनो
            वक्त की पुकार सुनो, वक्त की पुकार सुनो
कर्म-पथ दुर्गम है
वक्त भी न तेरे संगम है
समय समहित करने को
कंटिल पथ तुम सुगम मानो
वक्त की पुकार सुनो, वक्त की पुकार सुनो
            कंटिल पथ पर न लौटे अनन्तर
            सब होगा एक दिन छू-मंतर
            छू-मंतर करने में चाहे
            आसमान टुटे, पहाड़ टुटे
            अन्तर्मन की पहचान करो
            वक्त की पुकार सुनो, वक्त की पुकार सुनो
                                                                जे.पी. हंस