जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । वर्तमान में हिन्दी आशुलिपिक के पद पर पटना में कार्यरत । बेझिझक सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करना । अपनी मन की भावनाओं को लेखनी के रूप में कागज पर उतारना । पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- जेपी@डाटामेल.भारत या drjphans@gmail.com

सुविचार

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15 जनवरी 2015

वक्त की हालात

सुनाता हूँ हे मातृभूमि एक दर्द भरी कहानी ।
गम-ए-जदा हम ही नही, हर जन की यही जुबानी ।
कहने को तो कहते सब, एक ईश्वर की है संतान ।
फिर दाता क्यों बनाया, उच्च-नीच का विधान ।
राज करता अदल-बदलकर वहीं केवल ठग से ।
क्या दाता तेरा छूट गया, लगाम अब इस जग से ।
मार-काट व खुन-खराबा, यही है इनकी मर्दानी ।
जात-पात व धर्म-कर्म पर बाँटना, बची यही निशानी ।
आपसी झगड़े जब तक रहेगा या रहेगा बड़ा फर्क ।
इस जिंदगी से बेहतर होता, अगर मिल जाता नर्क ।
इस भूमि की यही कहानी, नरक से भी बदतर है ।
सुनने में आया ये हालात तो अभी कमत्तर है ।
ऐसी रही हालात तो क्या होगा आने वाले दिनो में ।
बम-तोप से मर मिटेंगे, जलेंगे उन्हीं मशीनों में