जेपी हंस

मेरी फ़ोटो
मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- jpn.nsu@gmail.com

सुविचार

जेपी-डायरी में आपका स्वागत है । अपना मूल्यवान समय निकालकर आने हेतु आभार । अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें ।

31 जनवरी 2015

मन चंगा तो कठौती में गंगा

03 फरवरी को संत रविदास की जयंती है । संत रविदास को रैदास के नाम से भी जाना जाता है । 14वीं शताब्दी में जन्में इस संत ने अपने समय में समाज में फैली जाति-पांति, धर्म, छुआछूत, पाखंड, अंधविश्वास आदि बुराईयों को दूर करने के लिए अनेक भक्तिमयी रचनाएं लिखीं । अपने उपदेशों द्वारा लोगों को पाखंड एवं अंधविश्वास को छोड़ कर सच्चाई के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया । उन्होंने ही मन चंगा तो कठौती में गंगा का संदेश देकर लोगों को सर्वप्रथम कर्म की प्रधानता बतलाया ।
इनके जयंती के अवसर पर शब्द क्रांति के द्वारा प्रस्तुत है एक कविता ।

मन चंगा तो कठौती में गंगा ।
कह गए संत रविदास ।
ये वचन क्यों तु भूल गया ।
डूब के बन गया भोग विलास।
पाखंड, अंधविश्वास और बुराइयाँ छो़ड़ ।
सच्चाई के पथ पर चलना ।
कर्म पूरी लगन से कर ।
परिश्रम से कभी भी न डरना ।
ये जाति-पांति, धर्म, छुआछुत ।
किसी मन में विपदा न खाए ।
खोरहर करें इस तन-मन को
सो मिट्टी में जल्दी मिल जाए ।
राम, रहीम और गुरुनानक ।
सब एक ही का है नाम ।
ईश्वर भक्ति के पचड़े में न पड़कर ।
मिलजुलकर करै सब अपना काम ।
वेद, कुरान, बाईबिल, गुरुगंथ में ।
एक ही ईश्वर का है गुणगान ।
धर्म-कर्म के लफड़े में न पड़कर ।
इनके विचारों से करै स्नान ।
मन चंगा तो कठौती में गंगा ।
कह गए संत रविदास ।

हँसी के गोलगप्पे

(1)
दो औरतें को 20 साल की सजा हुई । 20 साल बाद दोनों जेल से बाहर निकली और एक दूसरे से मुस्कुरा कर बोली, चल, बाकी बातें घर जा कर पूरी करते हैं ।
(2)
एक छात्र ने गणित के अध्यापक से कहा-सर....   अंग्रेजी के अध्यापक तो अंग्रेजी में बातें करते है, हिन्दी के अध्यापक हिन्दी में बातें करते हैं । आप भी गणित में बात क्यों नहीं करते ।
अध्यापक-ज्यादा तीन-पाँच न कर फौरन नौ-दो ग्यारह हो जा, नहीं तो चार-पाँच रख दूँगा तो छठी का दूध याद आ जाएगा ।
(3)
संता ने अपनी बेटी के रूम में सिगरेट देखा ।
संता-हे भगवान, ये सिगरेट पीने लगी ।
फिर शराब की बोतल देखी,
संता- हे भगवान, शराब भी पीने लगी ।
कुछ देर बाद लड़की के रूम में एक लड़के को देखा ।
संता- हे भगवान, मेरी सब शक दूर हो गई, सब कुछ इस लड़के का है ।