जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- jphans25@gmail.com

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5 जनवरी 2016

आराम करो महाशय जी...

#कॉपी_पेस्ट
आराम करो  महाशय जी
गरम  रजाई को ओढ़ ।
समझ गए नहीं दे पाओगे
तुम जवाब मुँह तोड़ ।।
बर्दास्त नहीं अच्छे दिनों में
घुट घुट कर यूं जीना ।
आर्टिफीशियल लगता है
वो छप्पन इंची सीना  ।।
मरते जाएँ सैनिक अपने
देते रहे  यूं  शहादत ।
फर्क नहीं पड़ता तुम्हे
यह है तुम्हारी आदत
मंचो पर जब भी आते
झूठी हुंकार भरते हो ।
पता नहीं क्या है मन में
बस मन की बातें करते हो ।।
प्रेमपत्र तुमने भी भेजे
कर ली खूब मुलाकातें ।
तुमने हाथ मिलाया खूब
पर उसने मारी लातें  ।।
अब भी खून न खौला हो तो
फिर से एक दौरा कर लो ।
रह गया हो बाकी कुछ तो
फिर से अपनी छाती भर लो ।।
ट्विटर पर  हुंकार लो फिर से
शब्दों के तीर छोड़ .....।
समझ गए  नहीं दे पाओगे
तुम जवाब मुँह तोड़   ।।
                       -अज्ञात

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