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जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- jpn.nsu@gmail.com

3 अप्रैल 2016

प्रत्यूषा बनर्जी पर एक गजल।

जमशेदपुर शहर के मशहूर टीवी कलाकार प्रत्यूषा बनर्जी का असमय गुजरने पर जमशेदपुर शहर में रहने वाले जेपी हंस की कलम भला कैसे चुप रह सकता । प्रस्तुत है एक गजल।
कम उम्र की जिंदगी मे कोई दीवाना न होता।काश ये जिंदगी बीच छोड़कर जाना न होता।
बहुत काँटे है जिंदगी के इस सफर में।
हर कांटों पर गुजरना सबको गवारा न होता।
वादे किये थे बहुत जहां सवारने को ।
इस तरह छोड़ने से उजाला न होता।।
चाहने वालों के दिल पर चर्चा है आपकी।
काश इनके सपनों को कोई सवांरा होता।
गम छाए है बहुत इस शहर में।
काश दुबारा जन्म लेकर यहाँ आना होता।
                           -जेपी हंस

प्रत्यूषा बनर्जी से एक सवाल

एक अप्रैल को बालिका वधु में आनंदी के नाम से हर घर मे छाने वाली प्रत्यूषा बनर्जी ने आत्महत्या कर अपनी जिंदगी समाप्त कर ली। प्रत्यूषा जमशेदपुर शहर के सोनारी के रहने वाली थी। मैं भी प्रत्यूषा के आवास से चंद कदमो की दूरी पर डेढ़ साल रहा । अभी भी जमशेदपुर मे ही हूँ ।
प्रत्यूषा की आत्महत्या पर इनके चाहने वाले बस एक ही लब्ज कह रहे है।
"हमें गम है शिकवे भी है,हजारों उन परवानो से।
कैसे बनू फैन उनके जो छोड़ चले जाते है जमाने से।