सुविचार

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24 नवंबर 2016

जमशेदपुर कवि सम्मेलन

दोस्तों, कल मैं एक कवि सम्मेलन में गया था,वहां कवि सम्मेलन के पोस्टर में कवि सम्मेलन की जगह कवि सम्म लेन लिखा हुआ था. इस बात की जानकारी जब मैं सम्मेलन के अध्यक्ष महोदय को दी तो यह गुस्सा बैठे तो मैंने भी मौके का तड़का देख खड़का दिया जो इस प्रकार हैं....
अपनी बातों को वे येन- प्रकारेण कह बैठे,
सम्मेलन को वे सम्म लेन कह बैठे ,
मंच पर जो बैठे थे कविवर मित्र,
दाढ़ी देख कर उन्हें भी लादेन कहां बैठे..
इतनी बातों पर पुनः झुंझला गए..जो मैंने इस प्रकार बया किया...

इतनी सी बातों से परेशानी होने लगी,
सुन सुन के मुझे भी हैरानी होने लगी,
उलझ पड़े वो हमसे इस तरह,
  बातों ही बातों में पहलवानी होने लगी...