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12 अप्रैल 2017

आवारा कुत्ता और देशद्रोही



आवारा कुत्ता और देशद्रोही दोनों में काफी समानता है । आवारा कुत्ता की उत्पति स्वामी भक्त, विश्वास भक्त कुत्ते से हुई और उसी तरह देशद्रोही की उत्पति देशभक्त से हुई । आवारा कुत्ता स्वामी भक्त कुत्ता बनकर अपनी स्वामी की सेवा करता था जैसे गेट के पास अनजान आदमी को देखकर भौकना, मालिक को देखकर दुम हिलाना । जिसके बदले में स्वामी कुत्ते को गाड़ी में घुमाता, महंगे-महंगे बिस्कुट खिलाता, महंगे रजाईयों में रखता, पर्यटन स्थलों की सैर कराता । कुत्ता स्वामी के पास ऐशोआराम रहते-रहते मस्त रहने का आदि हो गया । आखिर कुत्ता, कुत्ता ही होता है । वह और ज्यादा आराम तलबी से रहने को सोचने लगा । अब वह अपने स्वामी के बस से बाहर होता जा रहा था तो एक दिन स्वामी ने झुझलाकर घर से बाहर कर दिया । महलों में रहने वाला कुत्ता अपने बदनसिबीपन से सड़क पर आ गया । सड़क पर आने पर उसे आवारा कुत्ता का दर्जा मिला । आवारा कुत्ता का काम अब स्वामी या किसी भी इंसान का भक्त बनना नहीं रह गया । वह झुझलाकर किसी इस बालक को काट बैठता तो कभी उस बालक को । कभी सड़क पर इधर से घुसता तो कभी उधर से घुसता । इस हालालत में पड़े कुत्ते को पागल कुत्ता भी कहा गया । बीचोबीच सड़क पर आ जाने से आज भी कई कुत्ते, कुते के मौत मर जाते हैं । एकाएक सड़क पार कर जाने से कितने साईकिल, मोटरसाईकिल सवार व्यक्ति को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता ।
      यही हाल देशद्रोहियों की भी है । देशद्रोही बनने से पहले वे काफी उच्च किस्म में देशभक्त थे । हो भी क्यों न, हमारा देश सदा से ही उच्च आदर्शों पर देशभक्तों से भरा रहा है । लेकिन जब से विदेशी आक्रमण शुरु हुए । विदेशी विचारधारा का आगमन हुआ । देशभक्त व्यक्ति जो कर तक भारत माता के सच्चा सुपुत्र था, अव विदेशी विचारधारा अपनाकर देशद्रोही के श्रेणी में आ गया । हालात आवारा कुत्ते जैसे हो गए । पुरे दुनिया से जब देशद्रोहियों का सफाया हो गया तो अब भारत माता के सच्चे सुपुत्र होकर भारत माता को डायन कहते हैं । वे आवारा कुत्ते की भाँति रोज भाषण देते है, मिडिया में अपने मलिन विचार परोसते है फिर भी कहते हैं कि हमारी बोलने की आजादी का गला घोटा जा रहा है, जिस तरह आवारा कुत्ते भौक-भौक कर अपने मालिक से ज्यादा सुख की मांग करते, उसी तरह देशद्रोही भी । अब ज्यादा समय नहीं रह गया है, जब किसी साईकिल, मोटरसाईकिल सवार को दर्घटना ग्रस्त करता आवारा कुत्ता और अपने दुषित विचार से समाज को लकवाग्रस्त करता देशद्रोही अंत में खुद कुत्ते की भाँति बीच सड़क पर कुत्ते की मौत मरेंगे, जबकि दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति ईलाज करवाकर और लकवाग्रस्त व्यक्ति लकवा ठीक करवाकर खुद को ज्यादा सशक्त बनेगा ।