जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। मन की भावनाओं को लेखनी के रूप में कागज पर उतारना । पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- जेपी@डाटामेल.भारत या drjphans@gmail.com

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11 मई 2017

सपने थे हजार (गजल)



सपने थे हजार उनके मन में,
पर कोई उजाला ला न सका ।
भटकता रहा दर-दर पगडंडियों पे,
पर कोई सामने आ न सका।
हजार रास्ते बनाये रहमो-करम ने,
पर कोई रास्ता पहुँचा न सका ।
ढोता रहा सपनों का बोझ,
पर कोई उसे उठा न सका ।
सहता रहा हजार जुल्मों-सितम,
पर कोई कहर का जवाब दे न सका ।
सपने थे हजार उनके मन में,
पर कोई उजाला ला न सका ।


काश तु मिलती (गजल)





काश तु मिलती तो एक दिन ।
आखें फड़फड़ाके कहती है ।
दो जिस्म एक जान होती ।
धड़कने  पुकार कर कहती है ।
झुठ नहीं बोलती वो नयन ।
जो गिड़गिड़ा के कहती है ।
जग जाहिर ही होते है वो ।
सपने जिनके कामयाब होती है ।
आँखों के आसुँ से भर गये गागर ।
गागर की लहरे उफान भरके कहती है ।
काश तु मिलती तो एक दिन ।
आखें फड़फड़ाके कहती है ।