जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । वर्तमान में आयकर विभाग मे हिदी आशुलिपिक के पद पर कार्यरत । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। मन की भावनाओं को लेखनी के रूप में कागज पर उतारना । पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- जेपी@डाटामेल.भारत या drjphans@gmail.com

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8 दिसंबर 2017

बन गई थी वो दोस्त मेरे...

बन गई थी वो दोस्त मेरे बाजार-ए-शाम खड़े-खड़े ।
निकल गई किसी और के संग, रह गए अरमां धरे-धरे ।
वो तो कटी पतंग थी, मैं तो ठहरा मांझा ।
आंसुओं का क्या रोकना, गम भी न कर सकता साझा ।
झर-झर आंसू बहा रहा हूँ, बिस्तर पर पड़े-पड़े ।
बन गई थी वो दोस्त मेरे बाजार-ए-शाम खड़े-खड़े ।
यो क्यों पूछते हो तुम, पल-पल में हाल मेरा ।
जिसका न कोई हमसफर है, कैसे कटेगी शाम-सबेरा ।
सफर के हमसफर लाने, फिर से फेक रहा हूँ डोरा ।
अपनी किस्मत रूठी रहे या हाथ में आये कटोरा ।
लेकर कटोरा पार्क में बेचूँगा चना-चबेने ।
बन गई थी वो दोस्त मेरे बाजार-ए-शाम खड़े-खड़े ।
                               जेपी हंस

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