04 October, 2014

दर्शन दो मईया दर्शन दो


दर्शन दो मईया दर्शन दो
मईया दर्शन दो..............2
कि तेरा भक्त बुला रहा है।
            इस जग का है कैसा नाता
            कोई न भक्तन की सुधि लाता
            भक्तों की है मैया यही पुकार
            दर्शन दो मईया दर्शन दो
काली घटा देख मन घबराता
बीच भॅवर में कुछ न सुहाता
नित्य दिन करू मैं तेरी इंतजार
दर्शन दो मईया दर्शन दो.............2
            भाग-दौड़ का है यह जमाना
            सब के सपनों का तुही खजाना
            तेरी करू मैं सदा जयजयकार
            दर्शन दो मईया दर्शन दो............2
                                                 जे.पी. हंस




जूते की अभिलाषा


चाह नहीं मैं आम जनों के
पैरों में पहना जाऊँ
चाह नहीं मैं बस ट्रकों के
पीछे ही लटकाया जाऊँ
            चाह नहीं मैं मोची बाबू
            के थैलों में पड़ा रहूँ
            चाह नहीं घरों की दीवार के
            सामने ही लटकाया जाऊँ
मुझे पहन लेना ओ क्रोधी
उस जन पर देना तू फेंक
अपने वतन की नाक काटने
जिस मंच विराजे भीड़ अनेक
                             जे.पी. हंस