धारा पर धारा

Friday, November 14, 2014
मंच पर बैठे-बैठे बहुत देर हो गई थी, हमारी एक टांग भी सो गई थी । सो हम उठे ।     एक कवि मित्र पूछ बैठे-                    -क...
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