जेपी हंस

मेरी फ़ोटो
मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- jphans25@gmail.com

सुविचार

जेपी-डायरी में आपका स्वागत है । अपना मूल्यवान समय निकालकर आने हेतु आभार । अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें ।

4 दिसंबर 2014

संस्कार

मेरे गाँव-मुहल्लों में जो दिवाना है ।
वहीं पर बुढ़े-बुजुर्गों का भी आशियाना है ।
मैंने गॉव-मुहल्लों के चीख से जाना ।
ये समाज कई वर्ष पुराना है ।
ऐसे संस्कारों से जिंदगी नहीं चलती ।
जिसका लक्ष्य बुजुर्गों को सताना है ।
दिल दुखाते है सब एक दूसरें को मगर
मुश्किल से हमें ही तो बचाना है ।
बुजुर्गों की आहट से डरती थी जिंदगी ।
आज उन्हें अपना घर विराना है ।
लड़ते है बाप-बेटे एक दूसरे से ।
ये हरकत बहुत बचकाना है ।
दुख-दर्द की आँधियाँ बहेगी ।
फिर भी हरपल हमें मुस्कुराना है ।
आँधी, बारिश या तुफान भी आये ।
हमें तो बस चलते ही जाना है ।
आज कु-संस्कारों से चलते पसरा है सन्नाटा ।
इस सन्नाटों से एक दास्तां बनाना है ।
चमगादड़ों की फौज से कहीं है बेहतर ।
आँधियों में एक दीप जलाना है ।
पढ़ों साहित्य, अपनाओं अपनी संस्कृति ।
फिर समाज में अच्छे संस्कार लाना है ।
मेरे गाँव-मुहल्लों में जो दिवाना है ।
वहीं पर बुढ़े-बुजुर्गों का भी आशियाना है ।
                             जे.पी. हंस