संस्कार

गुरुवार, दिसंबर 04, 2014
मेरे गाँव-मुहल्लों में जो दिवाना है । वहीं पर बुढ़े-बुजुर्गों का भी आशियाना है । मैंने गॉव-मुहल्लों के चीख से जाना । ये समाज कई वर्ष...
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