जेपी हंस

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मूल रूप से बिहार राज्य के अरवल जिला के निवासी । वर्तमान में आयकर विभाग मे हिदी आशुलिपिक के पद पर कार्यरत । मां भारती का सच्चा सपूत। स्वतंत्र लेखक। मन की भावनाओं को लेखनी के रूप में कागज पर उतारना । पूर्वी दिल्ली से प्रकाशित पूर्वालोक, आयकर विभाग राँची से प्रकाशित आयकर जोहार, आयकर विभाग, पटना से प्रकाशित आयकर विहार, ऑनलाईन वेब पत्रिका पुष्पवाटिक टाईम्स, ब्लॉग-बुलेटिन, अनुभव एवं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाऐ. ई-मेल आई.डी- जेपी@डाटामेल.भारत या drjphans@gmail.com

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6 अगस्त 2015

कैसे आजाद है हम ?

कैसे कहूँ कि हिन्द के वासी है आजाद ।
यूँ कहूँ कि हम पहले से ज्यादा है बर्बाद ।
फर्क तो सिर्फ इतना है ।
अब मत पूछना  कितना है ।
पहले लूटते थे गोरे, आज काले लूट रहे हैं ।
महारानी राज करती थी पहले, आज नेता जी राज कर रहे हैं ।
आते हैं वे गरीबों के दर पर पंचवर्षिय योजना की भाँति ।
भेदभाव फैलाकर कहते, हम नहीं पूछते किसी का धर्म-जाति ।
गरीब जनता को चाहते है वे रखना, अनपढ़-गवार ।
ताकि यह सुनिश्चित हो, कभी न हो उनकी राजनीति हार ।
जीतने के बाद तो वे दिखते नहीं, गरीबों के किसी गाँव में ।
तड़पाते है किसी काम पर, छाले पर जाते  गरीबों के पाव में ।
विकास का कार्य सिर्फ दिखते  है प्रोग्रेस रिपोर्ट में ।
जनता का है कोई नहीं, भगवान ही है केवल सुपोर्ट में ।
गरीबों के विकास की छाया दिखती है  उसकी शक्ल में ।
आजादी के  नाम पर होती बर्बादी, न घुसी उनकी अक्ल में ।
जिस दिन अक्ल खुल जाएगी, उस दिन होगी सच्ची आजादी ।
 नेता जी डर जाऐगे सब, रूक जाएगी सबकी बर्बादी ।


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