धरा की जननी कौन है?

Sunday, September 18, 2016
विवश है आज धरा पर नारी, अपनी अस्मत बचाने को । रक्षक ही भक्षक बन बैठे, पल-पल उन्हें सताने को । मुद्दे जघन्य है जर्रा-जर्रा पर, कर्तव...

हिन्दी हूँ मैं....

Monday, September 12, 2016
“ निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटै न हिय को शूल. ”       उपरोक्त पंक्तियाँ भारतेंदु हरिश्चंद ने हिंद...
Powered by Blogger.