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13 मार्च 2017

हमारी नव वर्ष आई है।

छटा धुंध कुहासा हटी
फागुनी रूप निखराई है।
प्रकृति दुलहनि रूप धरकर
स्नेह सुधा बरसाई है ।
हमारी नव वर्ष आई है।
शस्य- श्यामला धरती माता
घर-घर खुशहाली लाई है।
चैत- शुक्ल की प्रथम तिथि
नव तरंग फैलाने आई है।
हमारी नव वर्ष आई है।
मरु तरु श्रृंगारित होकर
बहारे आँचल में फागुन आई है।
आर्यावर्त की पावन भूमि पर
होली की तान सुनाई है।
हमारी नव वर्ष आई है।
        - जेपी हंस
होली और नव वर्ष की आपको और आपके पूरे परिवार को हार्दिक बधाई....

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