मेहंदी





मेहंदी
मेरे नाम की लगने वाली थी।
फूल सपनों की खिलने वाली थी।
बीत गयी सोलह सावन देखते-देखते,
आज उनके घर पराये की शहनाई बजने जा रही थी।

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