आभारी हूँ मैं।





दर्द मुहब्बत के सह लू ,
जख्मों का अधिकारी हूँ मैं।
पीठ पर जिसने खंजर घोंपे,
उन सब का आभारी हूँ मैं।

कोई टिप्पणी नहीं

अपना कीमती प्रतिक्रिया देकर हमें हौसला बढ़ाये।

Blogger द्वारा संचालित.